New Delhi: पहला उड़ान परीक्षण सफल… दुश्मन के हमले को नेस्तनाबूद करेगी एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली

पहला उड़ान परीक्षण: ऑपरेशन सिंदूर के साढ़े तीन महीने बाद भारत ने दिखाई ताकत… ओडिशा तट पर परीक्षण
दुश्मन के हमले को नेस्तनाबूद करेगी एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली गगनयान मिशन… अंतरिक्ष से वापसी के क्रू मॉड्यूल का परीक्षण कामयाब एकीकृत हवाई रक्षा हथियार प्रणाली (आईएडीडब्ल्यूएस) पर एक नजर
एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली
New Delhi: यह बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है
यह प्रणाली धीमी उड़ान वाले ड्रोन से लेकर दुश्मन दुस्मन के के तेज गति वाले विमानों और मिसाइलों को हवा में मार गिराने में सक्षम है
इसमें त्वरित प्रतिक्रिया वाली सतह से हवा में मार करने वाली सभी स्वदेशी मिसाइलें और शक्तिशाली लेजर हथियार शामिल [3]
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पहला उड़ान परीक्षण सफल…
यह प्रणाली स्वचालित तकनीक पर आधारित है व तत्काल खतरों का पत्ता लगाकर हमला करती है
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर में मजबूत हवाई रक्षा प्रणाली का प्रदर्शन कर चुके भारत ने इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। भारत ने ओडिशा तट से एकीकृत हवाई रक्षा हथियार प्रणाली (आईएडीडब्ल्यूएस) का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। यह प्रणाली दुश्मन देशों के हवाई हमलों को रास्ते में नेस्तनाबूद कर देगी।
एकीकृत हवाई रक्षा हथियार प्रणाली (आईएडीडब्ल्यूएस) पर एक नजर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईएडीडब्ल्यूएस को विकसित करने वाले रक्षा अनुसंधान धान एवं एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और सशस्त्र बलों को बधाई दी है। स्वदेशी हवाई रक्षा प्रणाली का शनिवार को 12:30 बजे ओडिशा तट से परीक्षण किया गया। यह परीक्षण ऑपरेशन सिंदूर के साढ़े तीन महीने बाद हुआ है।
दुश्मन के हमले को नेस्तनाबूद करेगी एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली
आईएडीडब्ल्यूएस बहुस्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली है। इसमें त्वरित प्रतिक्रिया वाली लक्ष्यों को पूरी सटीकता से नष्ट किया: परीक्षणों के दौरान उच्च गति वाले दो मानवरहित हवाई लक्ष्यों और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन को वायु रक्षा प्रणाली ने एकसाथ अलग-अलग दूरी एवं ऊंचाई पर निशाना बनाकर पूरी तरह से नष्ट कर दिया। वायु रक्षा प्रणाली के संचार और रडार सहित सभी हथियार प्रणाली घटकों ने त्रुटिरहित प्रदर्शन किया। लक्ष्यों का सटीकता से पता लगाकर उन्हें भेदा गया।[5]
सतह से हवा में मार करने वाली सभी स्वदेशी मिसाइल, बहुत कम दूरी की हवाई रक्षा प्रणाली मिसाइल और उच्च शक्ति वाली लेजर आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार (डीईडब्ल्यू) प्रणाली शामिल हैं। हवाई रक्षा प्रणाली को रिसर्च सेंटर इमारत और डीईडब्ल्यू को सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड सभी हथियार प्रणाली घटकों को डीआरडीओ प्रयोगशाला की ओर से विकसित केंद्रीकृत कमान व नियंत्रण केंद्र ने नियंत्रित किया गया, जो इस परीक्षण से जुड़े विकास कार्यक्रम की नोडल प्रयोगशाला है।
बहुस्तरीय हवाई रक्षा क्षमता स्थापित
- इस अद्वितीय उड़ान परीक्षण ने हमारे देश की बहुस्तरीय हवाई रक्षा क्षमता को स्थापित किया है और यह दुश्मन के हवाई खतरों के खिलाफ रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाएगी। -राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
गगनयान मिशन… अंतरिक्ष से वापसी के क्रू मॉड्यूल का परीक्षण कामयाब

New Delhi:
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पैराशूट की मदद से पहला एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण (आईएडीटी-01) सफलतापूर्वक पूरा किया। यह भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की तैयारी में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। परीक्षण के दौरान वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर
के जरिये 4 किलोमीटर की ऊंचाई से क्रू मॉड्यूल एयर ड्रॉप किया गया।
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इसरो के अनुसार, वायुसेना डीआरडीओ,
नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल सहित कई रक्षा और अनुसंधान संगठनों के सहयोग से यह परीक्षण किया गया। इसका मकसद गगनयान मिशन के वक्त अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी तय करना है। साथ ही, यह जानना था कि अंतरिक्ष से फू मॉड्यूल को लाने वाले पैराशूट समय पर खुल रहे हैं या नहीं।
गगनयान मिशन की तैयारी में पूरी ताकत से जुटा इसरो इंसान को अंतरिक्ष में ले जाने वाले लॉन्च व्होकल एचएलवीएमउ रॉकेट को तैयार कर चुका है। इसके सुरक्षा परीक्षण पूरे हो चुके हैं
एकीकृत हवाई रक्षा हथियार प्रणाली (आईएडीडब्ल्यूएस) पर एक नजर
यह बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है
यह प्रणाली धीमी उड़ान वाले ड्रोन से लेकर दुश्मन दुस्मन के के तेज गति वाले विमानों और मिसाइलों को हवा में मार गिराने में सक्षम है
इसमें त्वरित प्रतिक्रिया वाली सतह से हवा में मार करने वाली सभी स्वदेशी मिसाइलें और शक्तिशाली लेजर हथियार शामिल [7]
यह प्रणाली स्वचालित तकनीक पर आधारित है व तत्काल खतरों का पत्ता लगाकर हमला करती है
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