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PLASTIC: प्लास्टिक खाने वाले कवक / प्लास्टिक की समस्या का समाधान

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PLASTIC: प्लास्टिक खाने वाले कवक / प्लास्टिक की समस्या का समाधान

PLASTIC:

एक ऐसा कवक है जिसका नाम पेस्टालोटिओप्सिस माइक्रोस्पोरा (Pestalotiopsis microspora) है, जो प्लास्टिक, खासकर पॉलीयूरेथेन को खा सकता है. यह कवक इक्वाडोर के अमेज़ॅन वर्षावन में पाया गया था और यह बिना ऑक्सीजन के भी पनप सकता है.


पेस्टालोटिओप्सिस माइक्रोस्पोरा प्लास्टिक को कैसे खाता है:

पेस्टालोटिओप्सिस माइक्रोस्पोरा


यह कवक सेरीन हाइड्रोलेस नामक एंजाइम का उपयोग करके पॉलीयूरेथेन प्लास्टिक को तोड़ता है.
यह PETase नामक एंजाइम का उपयोग करके PET (पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट) प्लास्टिक को भी तोड़ सकता है.
यह कवक प्लास्टिक को कार्बन स्रोत के रूप में उपयोग करता है, जिससे यह ऊर्जा प्राप्त करता है.
प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए, वैज्ञानिक इस कवक और अन्य प्लास्टिक-अपघटन करने वाले जीवों का उपयोग करने के तरीकों की तलाश कर रहे हैं.


अन्य प्लास्टिक-अपघटन करने वाले जीव:


एस्परगिलस टेरेस (Aspergillus terreus):

Aspergillus terreus


यह कवक भी प्लास्टिक को खा सकता है.
इडियोनेला साकाईनेसिस (Ideonella sakaiensis):
यह एक बैक्टीरिया है जो PET प्लास्टिक को पचा सकता है.


मोम खाने वाले कीड़े (Waxworms):
ये कीड़े भी प्लास्टिक को खा सकते हैं.


मीलवर्म (Mealworms):

Mealworms


ये कीड़े प्लास्टिक को कार्बन डाइऑक्साइड और जैव-अपघटनीय मल में बदल सकते हैं.
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्लास्टिक प्रदूषण एक जटिल समस्या है, और इन जीवों का उपयोग करके इसे पूरी तरह से हल नहीं किया जा सकता है. प्लास्टिक उत्पादन को कम करना और प्लास्टिक के पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना भी महत्वपूर्ण है.

“मीलवर्म” जो “टेनेब्रियो मोलिटर” बीटल के लार्वा रूप हैं. ये कीड़े अपनी आंतों में मौजूद बैक्टीरिया की मदद से प्लास्टिक को तोड़ सकते हैं.
विस्तार से:
मीलवर्म (Mealworms):
ये “टेनेब्रियो मोलिटर” बीटल के लार्वा होते हैं, जो प्लास्टिक, विशेष रूप से पॉलीस्टाइरीन को खाने की क्षमता रखते हैं.
पॉलीस्टाइरीन:
मीलवर्म स्टायरोफोम जैसे पॉलीस्टाइरीन प्लास्टिक को खा सकते हैं, जो कि एक सामान्य प्रकार का प्लास्टिक है.
बैक्टीरिया का योगदान:
मीलवर्म की आंतों में मौजूद बैक्टीरिया प्लास्टिक को तोड़ने में मदद करते हैं, जिससे वे प्राकृतिक रूप से प्लास्टिक को विघटित करने वाले जीव बन जाते हैं.
कैसे काम करता है:
एक अध्ययन में, मीलवर्म को एक महीने तक केवल पॉलीस्टाइरीन खिलाया गया, और उन्होंने इसे ऊर्जा के लिए इस्तेमाल किया, लगभग आधा प्लास्टिक कार्बन डाइऑक्साइड में बदल गया, और बाकी पाचन के बाद मल के रूप में निकला, एक वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार.
अन्य प्लास्टिक:
कुछ अन्य कीड़े जैसे “वैक्स वर्म” भी कुछ प्रकार के प्लास्टिक को खा सकते हैं.
प्लास्टिक प्रदूषण में भूमिका:
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये कीड़े प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने में मदद कर सकते हैं, विशेष रूप से उन प्लास्टिकों के लिए जो पारंपरिक तरीकों से रीसायकल करना मुश्किल है |

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