यूपी में शिक्षामित्र चयन की 2143 फाइलें गायब, डीएम के निर्देश पर सेवानिवृत्त पटल सहायक पर मुकदमा
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में शिक्षामित्रों के चयन से जुड़ी बड़ी संख्या में फाइलें गायब होने का मामला सामने आया है। बेसिक शिक्षा विभाग में कुल 2169 शिक्षामित्रों के चयन की प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड होना बताया गया है, लेकिन वर्तमान में कार्यालय में केवल 26 फाइलें ही उपलब्ध हैं। इस तरह 2143 फाइलों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से विभाग में हड़कंप मच गया है।
मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब कुछ शिक्षामित्रों से जुड़े मामलों में न्यायालय ने चयन संबंधी फाइलें तलब कीं। विभाग के पास संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिकारियों के सामने न्यायालय में जवाब देने की समस्या खड़ी हो गई। इसी मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने वर्तमान पटल सहायक से जानकारी मांगी। वर्तमान पटल सहायक धर्मेश कुमार ने बताया कि उन्हें पूर्व पटल सहायक प्रदीप चौहान से केवल 26 फाइलें ही प्राप्त हुई थीं।
बताया गया है कि प्रदीप चौहान वर्ष 2010 से 2021 तक बीएसए कार्यालय में शिक्षामित्रों से जुड़े पटल का काम देखते रहे। वर्ष 2021 में वह सेवानिवृत्त हो गए। विभाग की ओर से उन्हें नोटिस जारी कर गायब फाइलों के संबंध में जानकारी मांगी गई थी, लेकिन विभाग के अनुसार उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद मामले की जानकारी जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी को दी गई।
डीएम के निर्देश पर सेवानिवृत्त पटल सहायक पर मुकदमा
मामले में जिलाधिकारी के निर्देश के बाद खंड शिक्षाधिकारी रविप्रकाश ने कोतवाली मैनपुरी में सेवानिवृत्त पटल सहायक प्रदीप चौहान के खिलाफ तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। सीओ सिटी अशोक कुमार सिंह के अनुसार, खंड शिक्षाधिकारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब मामले की जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
फाइलों के गायब होने का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षामित्रों के चयन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड का उपयोग न्यायालयी मामलों और विभागीय जांच में किया जा सकता है। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से संबंधित मामलों में विभाग को अपनी स्थिति स्पष्ट करने में कठिनाई हो रही है। अब जांच के दौरान यह सामने आना बाकी है कि 2143 फाइलें आखिर कहां गईं और रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं है।
पूर्व पटल सहायक ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, सेवानिवृत्त पूर्व पटल सहायक प्रदीप चौहान ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि शिक्षामित्रों से संबंधित पटल का प्रभार उन्हें कभी लिखित रूप में नहीं दिया गया था। उनके अनुसार, उन्हें केवल मौखिक रूप से काम देखने के निर्देश दिए गए थे।
प्रदीप चौहान का कहना है कि उनसे पहले जो पटल सहायक कार्यरत थे, उनसे भी उन्हें किसी तरह की फाइलें रिसीव नहीं कराई गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में किसी शिक्षामित्र का चयन नहीं हुआ था। उनके अनुसार, उन्होंने 26 शिक्षामित्रों की फाइलें तैयार की थीं और उन्हें विभाग को सौंप दिया गया था। पूर्व पटल सहायक ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।
बीएसए ने क्या कहा
मैनपुरी के बीएसए सूर्य प्रताप सिंह के अनुसार, कार्यालय में शिक्षामित्रों के चयन से संबंधित फाइलें उपलब्ध नहीं हैं। वर्तमान पटल सहायक ने केवल 26 फाइलें मौजूद होने की जानकारी दी है। इस संबंध में पूर्व पटल सहायक प्रदीप चौहान को नोटिस जारी करके जानकारी मांगी गई थी, लेकिन विभाग के अनुसार उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
अब पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान रिकॉर्ड के संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। शिक्षामित्र चयन की 2143 फाइलों का मामला सामने आने के बाद विभागीय रिकॉर्ड की सुरक्षा और पुराने दस्तावेजों के रखरखाव को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आगे की जांच में ही स्पष्ट होगा कि गायब फाइलों का वास्तविक कारण क्या है और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
