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Success Story: डिग्री ली, नौकरी नहीं मिली… खेती में लगाया दिमाग, आज लाखों में बेच रहे हैं ‘काला सोना ‘

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Success Story
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Jalor Farmer Success Story:

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पढ़ाई लिखाई :Success Story

जालोर. पढ़ाई के बाद सरकारी नौकरी की तलाश में भटकते कई युवाओं की तरह जालोर के सायला गांव के बलवंत लखाणी भी लंबे समय तक प्रयास करते रहे. उन्होंने उदयपुर से बीएड करने के बाद कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता नहीं मिली. हताशा के समय बड़े भाई भंवरलाल, जो कृषि विभाग में सुपरवाइजर हैं, ने उन्हें खेती की ओर प्रेरित किया. इसी सलाह ने बलवंत की जिंदगी बदल दी. आज वे ऑस्ट्रेलियाई लाल केंचुओं से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रहे हैं, जिसे किसान काला सोना कहते हैं.

किसान बलवंत ने लोकल 18 को बताया कि दिसंबर 2022 में अपने खेत में वर्मी कंपोस्ट यूनिट की शुरूआत की. उन्होंने बताया कि शुरुआत में गोबर को सात दिन तक खेत में एक जगह रखकर उस पर नियमित पानी का छिड़काव किया जाता है. इसके बाद लगभग 20 फीट लंबे बेड तैयार कर उसमें केंचुए डाले जाते हैं. दो महीने में उच्च गुणवत्ता की वर्मी कंपोस्ट तैयार हो जाती है. इस प्रक्रिया में 100 किलो खाद में करीब दो किलो केंचुए सक्रिय रहते हैं. वर्तमान में बलवंत के पास 80 बेड हैं और एक बेड से लगभग एक हजार रुपए की खाद मिल जाती है.

फसलों की सेहत का राज है काला सोना

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Success Story :बलवंत लखाणी ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट में 16 से ज्यादा पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो खेतों की उर्वरता और फसलों की पैदावार बढ़ाने में मददगार हैं. यही कारण है कि इसे किसान ‘काला सोना’ कहते हैं. यह खाद फलदार पौधों और अनार की खेती के लिए विशेष रूप से लाभकारी है. आज उनकी तैयार जैविक खाद की मांग न सिर्फ राजस्थान बल्कि गुजरात तक है. खाद तैयार करने के साथ-साथ बलवंत ने अपनी नर्सरी भी विकसित की है. खास मटकों की तकनीक से वर्मीवॉश और जैविक कीटनाशक स्प्रे भी तैयार करते हैं.

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सालाना चार से पांच लाख तक कर रहे कमाई

इस काम से बलवंत ने खुद के साथ बहुत मजदूरों को भी रोजगार दिया है. अब तक बहुत किसानों को वर्मी कंपोस्ट बनाने की ट्रेनिंग दे चुके हैं. बलवंत का कहना है कि जैविक खाद के इस्तेमाल से खेतों की मिट्टी की सेहत सुधरती है और उपज भी जहरमुक्त होती है,और इससे वह सालाना चार से पांच लाख रुपए भी कमा लेते हैं.


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इस काम से बलवंत ने खुद के साथ बहुत मजदूरों को भी रोजगार दिया है. अब तक बहुत किसानों को वर्मी कंपोस्ट बनाने की ट्रेनिंग दे चुके हैं. बलवंत का कहना है कि जैविक खाद के इस्तेमाल से खेतों की मिट्टी की सेहत सुधरती है और उपज भी जहरमुक्त होती है,और इससे वह सालाना चार से पांच लाख रुपए भी कमा लेते हैं.


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