शिक्षक बर्खास्तगी मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पुरानी नियुक्ति रद्द होने की जानकारी न देना पर्याप्त आधार नहीं

शिक्षक बर्खास्तगी मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पुरानी नियुक्ति रद्द होने की जानकारी न देना पर्याप्त आधार नहीं

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षक की सेवा समाप्ति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भर्ती के आवेदन पत्र में किसी विशेष जानकारी को देने के लिए स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है, तो केवल उस जानकारी का उल्लेख न करने के आधार पर अभ्यर्थी की नियुक्ति समाप्त नहीं की जा सकती। इसी आधार पर कोर्ट ने संतकबीरनगर के एक सहायक शिक्षक की सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर दिया।

यह मामला एक ऐसी नियुक्ति से जुड़ा है, जिसमें शिक्षक की पिछली नियुक्ति पहले ही रद्द की जा चुकी थी। बाद में विभाग ने आरोप लगाया कि शिक्षक ने नई नियुक्ति के दौरान अपनी पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी छिपाई। इसी आरोप को आधार बनाकर वर्ष 2019 में उनकी वर्तमान सेवा भी समाप्त कर दी गई थी। शिक्षक ने विभाग के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

वर्ष 2015 में हुई थी शिक्षक की नियुक्ति

मामले के अनुसार संतकबीरनगर निवासी अनिल कुमार वर्ष 2015 में शिक्षक पद पर नियुक्त हुए थे। इससे पहले वह विशेष बीटीसी भर्ती के माध्यम से शिक्षक पद पर नियुक्त हुए थे। वर्ष 2018 में शिकायत के बाद हुई जांच में उनकी बीएड की डिग्री फर्जी पाई गई।

जांच के बाद उनकी वर्ष 2010 में हुई पिछली नियुक्ति को रद्द कर दिया गया। इसके बाद विभाग ने उनकी वर्तमान सेवा पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि वर्ष 2015 की भर्ती के दौरान उन्होंने अपनी पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी विभाग से छिपाई थी।

इसी आधार पर विभाग ने 20 अप्रैल 2019 को उनकी मौजूदा सेवा समाप्त कर दी। सेवा समाप्ति के इस आदेश से प्रभावित शिक्षक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और विभागीय कार्रवाई को चुनौती दी।

आवेदन पत्र में नहीं मांगी गई थी ऐसी जानकारी

याची की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि वर्ष 2015 की भर्ती के समय उनके शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच की गई थी और वर्तमान नियुक्ति के लिए प्रस्तुत शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज सही पाए गए थे।

याची का कहना था कि भर्ती आवेदन पत्र में ऐसा कोई स्पष्ट कॉलम या निर्देश नहीं था, जिसमें पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी देना अनिवार्य किया गया हो। ऐसे में इस जानकारी का उल्लेख नहीं करने को जानबूझकर तथ्य छिपाना नहीं माना जा सकता।

याची की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि पिछली नियुक्ति से जुड़ी घटना का वर्तमान भर्ती में चयन के लिए प्रस्तुत शैक्षणिक योग्यता से सीधा संबंध नहीं था। इसलिए केवल इस आधार पर वर्तमान नियुक्ति समाप्त करना उचित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी लिया गया आधार

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने आवेदन पत्र में मांगी गई जानकारी और अभ्यर्थी पर लगाए गए छिपाने के आरोप के बीच संबंध को महत्वपूर्ण माना।

कोर्ट के अनुसार, जब भर्ती प्रक्रिया में किसी जानकारी को स्पष्ट रूप से मांगा ही नहीं गया हो, तो केवल उसके उल्लेख न होने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अभ्यर्थी ने जानबूझकर कोई तथ्य छिपाया है।

हाईकोर्ट ने मामले के उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए माना कि वर्तमान नियुक्ति शैक्षणिक योग्यता के आधार पर हुई थी और पिछली नियुक्ति से जुड़ी घटना का वर्तमान चयन से सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ।

2019 का सेवा समाप्ति आदेश हुआ रद्द

मामले में न्यायमूर्ति मंज रानी चौहान की एकल पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने संबंधित तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद वर्ष 2019 में जारी सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया।

इस फैसले से संतकबीरनगर के संबंधित सहायक शिक्षक को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के आदेश का मुख्य आधार यह रहा कि जिस जानकारी को भर्ती आवेदन में स्पष्ट रूप से मांगा नहीं गया था, उसके उल्लेख न करने को मात्र इसी आधार पर तथ्य छिपाने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

नियुक्ति मामलों में क्या है महत्वपूर्ण

इस फैसले से यह बात सामने आती है कि सरकारी नियुक्तियों में अभ्यर्थी द्वारा जानकारी छिपाने के आरोप की जांच करते समय यह देखना जरूरी है कि संबंधित जानकारी आवेदन पत्र या भर्ती प्रक्रिया में स्पष्ट रूप से मांगी गई थी या नहीं।

सिर्फ किसी पुराने मामले या नियुक्ति से जुड़ी जानकारी का उल्लेख नहीं होने से ही सेवा समाप्ति उचित नहीं मानी जा सकती। इसके लिए यह भी देखा जाना जरूरी है कि भर्ती के समय अभ्यर्थी से वह जानकारी मांगी गई थी या नहीं और वर्तमान नियुक्ति पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है।

इस मामले में हाईकोर्ट ने इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षक के खिलाफ की गई सेवा समाप्ति की कार्रवाई को रद्द कर दिया।

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