UP Teacher Update: शिक्षकों को साल में दो बार मिलेगा चयन वेतनमान और प्रोन्नत वेतनमान का लाभ, शासनादेश जल्द
उत्तर प्रदेश के राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए चयन वेतनमान और प्रोन्नत वेतनमान से जुड़ी महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। शिक्षकों के वेतनमान संबंधी मामलों का समय पर निस्तारण करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग स्तर पर प्रक्रिया को नियमित करने की तैयारी की खबर है। इसके तहत जनवरी और जुलाई में चयन वेतनमान तथा प्रोन्नत वेतनमान से संबंधित प्रकरणों का निस्तारण किए जाने की व्यवस्था प्रस्तावित बताई जा रही है।
यदि इस व्यवस्था को शासन स्तर से मंजूरी मिलती है और संबंधित शासनादेश जारी होता है, तो पात्र शिक्षकों को वेतनमान का लाभ देने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। इससे उन शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके चयन वेतनमान या प्रोन्नत वेतनमान से संबंधित मामले लंबे समय से विभागीय स्तर पर लंबित हैं।
जनवरी और जुलाई में निस्तारित होंगे वेतनमान के मामले?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा विभाग शिक्षकों को चयन वेतनमान और प्रोन्नत वेतनमान देने की प्रक्रिया को नियमित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए साल में दो निर्धारित अवसरों पर प्रकरणों के निस्तारण की व्यवस्था किए जाने की चर्चा है। जनवरी और जुलाई में मामलों के निस्तारण से पात्र शिक्षकों की फाइलों को समय पर आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग जिलों में विभागीय कार्यवाही, अभिलेखों की जांच और स्वीकृति की प्रक्रिया के कारण शिक्षकों के प्रकरणों के निस्तारण में देरी होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार पात्रता पूरी करने के बाद भी शिक्षकों को वेतनमान का लाभ मिलने में समय लग जाता है। नियमित समय-सारणी लागू होने से ऐसी देरी कम करने में सहायता मिल सकती है।
हालांकि, जनवरी और जुलाई में निस्तारण की व्यवस्था को अंतिम रूप से लागू मानने से पहले संबंधित शासनादेश देखना जरूरी है। शासनादेश जारी होने पर ही इसकी वास्तविक प्रक्रिया, प्रभावी तिथि और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
10 वर्ष की सेवा पर चयन वेतनमान का लाभ
चयन वेतनमान शिक्षकों की सेवा से जुड़ा महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ है। निर्धारित सेवा अवधि और लागू नियमों के अंतर्गत पात्र शिक्षक इसके लिए विचार किए जा सकते हैं। उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, संबंधित व्यवस्था में 10 वर्ष की सेवा पूरी करने पर चयन वेतनमान का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, केवल सेवा अवधि पूरी कर लेना ही हर मामले में पर्याप्त नहीं होता। संबंधित शिक्षक की नियुक्ति, सेवा की गणना, पहले से प्राप्त वेतनमान, आवश्यक पात्रता और लागू शासनादेशों के आधार पर प्रकरण की जांच की जाती है। इसलिए शिक्षकों को अपने सेवा अभिलेख और विभागीय रिकॉर्ड सही रखने चाहिए।
यदि किसी शिक्षक की निर्धारित सेवा अवधि पूरी हो चुकी है और चयन वेतनमान का मामला लंबित है, तो वह अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य या संबंधित कार्यालय के माध्यम से प्रकरण की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकता है।
22 वर्ष की सेवा पर प्रोन्नत वेतनमान
चयन वेतनमान के साथ प्रोन्नत वेतनमान भी शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्ट में निर्धारित शर्तों के अधीन 22 वर्ष की सेवा पूरी करने पर प्रोन्नत वेतनमान का लाभ दिए जाने का उल्लेख है।
इसका उद्देश्य पात्र शिक्षकों को लागू सेवा नियमों के अनुसार वित्तीय लाभ उपलब्ध कराना है। संबंधित लाभ की गणना और स्वीकृति के लिए सेवा अवधि, पूर्व में मिले वेतनमान और अन्य निर्धारित शर्तों का परीक्षण किया जाता है। अलग-अलग परिस्थितियों में नियमों का प्रभाव अलग हो सकता है, इसलिए अंतिम पात्रता संबंधित विभागीय आदेशों के अनुसार ही निर्धारित होगी।
शिक्षकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी सेवा पुस्तिका, नियुक्ति संबंधी अभिलेख और वेतन निर्धारण से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर लें। इससे आवेदन या विभागीय परीक्षण के समय अनावश्यक देरी से बचने में मदद मिल सकती है।
335 शिक्षकों के लंबित एरियर भुगतान का मामला
शिक्षकों के चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान से जुड़ी खबर के साथ लंबित एरियर भुगतान का मामला भी चर्चा में है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के 335 शिक्षकों के लंबित एरियर मामलों का निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं।
रिपोर्ट में जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को नियमानुसार जांच कर पात्र शिक्षकों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 5 नवंबर की समय-सीमा का उल्लेख किया गया है। एरियर का भुगतान उन मामलों में किया जाता है, जहां लागू नियमों के अनुसार शिक्षक को पहले की अवधि का बकाया वित्तीय लाभ देय होता है।
हालांकि, भुगतान की पात्रता और वास्तविक राशि प्रत्येक शिक्षक के मामले में अलग हो सकती है। संबंधित कार्यालय को सेवा अभिलेख, वेतन निर्धारण और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद ही भुगतान की कार्रवाई करनी होगी। 5 नवंबर की समय-सीमा और निर्देशों की वर्तमान स्थिति की पुष्टि संबंधित आधिकारिक आदेश से की जानी चाहिए।
लगभग 6,000 शिक्षकों को मिल सकती है राहत
मीडिया रिपोर्ट में इस पहल से प्रदेश के लगभग 6,000 शिक्षकों को लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। यदि वेतनमान संबंधी प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया नियमित होती है, तो लंबे समय से लंबित मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इससे उन शिक्षकों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है, जो निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने के बाद भी चयन वेतनमान या प्रोन्नत वेतनमान की स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही, लंबित एरियर मामलों के निस्तारण से पात्र शिक्षकों को बकाया भुगतान मिलने का रास्ता भी साफ हो सकता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि लगभग 6,000 शिक्षकों को लाभ मिलने का आंकड़ा उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित है। इसे अंतिम लाभार्थी संख्या नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक संख्या विभागीय जांच और पात्रता निर्धारण के बाद ही स्पष्ट होगी।
शिक्षकों को अब क्या करना चाहिए?
शिक्षकों को सबसे पहले अपने सेवा अभिलेखों की जांच करनी चाहिए। यदि निर्धारित सेवा अवधि पूरी हो चुकी है और चयन वेतनमान या प्रोन्नत वेतनमान का मामला लंबित है, तो संबंधित विद्यालय या जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से इसकी स्थिति पता की जा सकती है।
जरूरत पड़ने पर शिक्षक अपने आवेदन, सेवा पुस्तिका, नियुक्ति संबंधी दस्तावेज और पूर्व वेतन निर्धारण से जुड़े अभिलेख उपलब्ध रखें। यदि एरियर का मामला लंबित है, तो कार्यालय से यह जानकारी लेना उपयोगी होगा कि प्रकरण किस स्तर पर लंबित है और कोई दस्तावेज बाकी तो नहीं है।
शिक्षकों को किसी भी अंतिम निर्णय के लिए आधिकारिक शासनादेश और विभागीय निर्देशों पर भरोसा करना चाहिए। शासनादेश जारी होने पर ही यह स्पष्ट होगा कि जनवरी और जुलाई में प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया किस प्रकार संचालित होगी और किन श्रेणियों के शिक्षकों पर यह व्यवस्था लागू होगी।
