Aasman mein andhera kyu
Aasman mein andhera kyu hota hai: तारों के बाद भी अंधेरा……….

रात के समय जब भी तुम आकाश देखते हो तो तुम्हें अनगिनत तारे दिखाई देते हैं। इसके बावजूद अंतरिक्ष में अंधेरा क्यों दिखाई देता है? आओ जानते हैं, इसका रहस्य।
यह सवाल तुम्हारे मन में अक्सर उठता होगा कि जब आकाश में असंख्य तारे चमक रहे हैं तो अंतरिक्ष का बाकी हिस्से में अंधेरा क्यों दिखता है?
1. रोशनी और अंधेरा {Aasman mein andhera kyu}
सबसे पहले एक बात समझना जरूरी है कि हमें सिर्फ वहीं चीजें दिखाई देती हैं, जिनकी रोशनी हम तक पहुंचती है।
मसलन, सुरज से रोशनी आती है, इसलिए दिन में सब कुछ चमकता है। रात में जब सूरज हमारे पास नहीं होता तो अंधेरा हो जाता है। अब तुम कहोगे कि तारे भी तो रोशनी देते हैं। तो उनकी रोशनों से पूरा आसमान रोशन क्यों नहीं हो जाता है?
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ओल्बर्स का विरोधाभास {Aasman mein andhera kyu}
यह सवाल कई सालों से वैज्ञानिकों को परेशान करता रहा। 19वीं सदी के एक जर्मन वैज्ञानिक हेनरिख ओल्बर्स ने एक
प्रश्न उठाया, जिसे ‘ओल्बर्स का विरोधाभास’ कहते हैं। उनका कहना था- अगर अनंत तारे हर दिशा में हैं तो रात का आसमान अंधेरा नहीं, बल्कि एकदम रोशन होना चाहिए। फिर भी हमें आसमान काला क्यों दिखाई देता है? इसके कुछ जवाब इस प्रकार हैं-
सभी तारे करीब नहीं हैं जो तारे हमें दिखते हैं, वे ज्यादा करीब हैं। दूर के तारों की रोशनी इतनी कम होती है कि वे हमें दिखाई नहीं देते और कुछ तारे तो इतने दूर हैं कि उनकी रोशनी अब भी हम तक पहुंची ही नहीं है।
प्रकाश की गति 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड रोशनी को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचने में समय लगता है। रोशनी की गति लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है। फिर भी अगर कोई तारा बहुत दूर है तो उसकी रोशनी को हम तक आने में करोड़ों साल लग सकते हैं। कई तारे तो ऐसे भी हैं, जिनकी रोशनी अब भी हम तक नहीं पहुंची है।
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बिग बैंग: वैज्ञानिकों के अनुसार,
हमारा पूरा ब्रह्मांड एक बड़े विस्फोट, जिसे हम ‘बिग बैंग’ कहते हैं, से शुरू हुआ था। तब से लेकर आज तक विश्व लगातार फैल रहा है। इसका मतलब यह है कि कई तारे और गैलेक्सियां हमसे इतनी दूर हैं कि उनकी रोशनी क्रभी हम तक पहुंच ही नहीं सकती।
2. अंतरिक्ष में कुछ भी नहीं होता {Aasman mein andhera kyu}
रात के आसमान में जो हमें काला नजर आता है, वो असल में खाली अंतरिक्ष है। अंतरिक्ष में हवा नहीं होती, इसलिए रोशनी वहां फैलती नहीं है। जब किसी दिशा में हमें कोई रोशनी नहीं दिखाई देती, तो अंधेरा नजर आता है। तुमको यह जानकर हैरानी होगी कि हम जितने तारे देखते हैं, वे तो बस एक छोटी-सी संख्या हैं। आकाशगंगा में ही लगभग 100 अरब तारे हैं और पूरे ब्रह्मांड में ऐसी अरबों गैलेक्सियां हैं। मतलब यह कि तारे तो अनगिनत हैं, लेकिन हम उनमें से कुछ को ही देख पाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो आसमान में चाहे जितने भी तारे हों, हम केवल उन्हों को देख पाते हैं, जिनकी रोशनी हम तक पहुंचती है।
आकाश काला या अंधकारमय इसलिए दिखता है, क्योंकि या तो तारों की रोशनी धरती तक पहुंची ही नहीं या इतनी कमजोर है कि हम देख नहीं सकते। यह खुशकिस्मती है कि हम ऐसे समय में जी रहे हैं. जब रात का आसमान संतुलित है-कहीं तारे हैं तो कहीं गहरा अंधेरा। यही मेल इसे रहस्यमय और सुंदर बनाता है।
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